Dhangar Population in India 2025 – धनगर जाति की जनसंख्या, इतिहास और वितरण
🇮🇳 भारत में धनगर जनसंख्या – इतिहास, परंपरा और वर्तमान स्थिति
भारत एक विविधता भरा देश है, जहाँ हर समुदाय की अपनी अलग पहचान, संस्कृति और परंपरा है। इन्हीं में से एक प्रमुख समुदाय है धनगर समाज। धनगर समाज का भारत के इतिहास, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे में विशेष योगदान रहा है। यह लेख भारत में धनगर जनसंख्या, उनकी जीवनशैली, इतिहास, और वर्तमान स्थिति पर आधारित है।
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🏞️ धनगर समाज का परिचय
धनगर समाज मुख्य रूप से चरवाहा समुदाय के रूप में जाना जाता है। “धन” का अर्थ है पशुधन, और “गर” का अर्थ है रक्षक। अर्थात् धनगर वह है जो पशुधन की रक्षा करता है।
यह समुदाय प्राचीन काल से ही भेड़, बकरी, गाय और भैंस पालने का कार्य करता आया है।
धनगर समाज को भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है —
महाराष्ट्र में: धनगर
कर्नाटक में: कुरुबा
आंध्र प्रदेश में: गोंडया या गोंडर
उत्तर भारत में: गड़रिय
📜 धनगर समाज का इतिहास
धनगर समाज का इतिहास बहुत पुराना है। वैदिक काल से ही यह समुदाय भारतीय समाज में उपस्थित रहा है। कहा जाता है कि यह लोग भगवान श्रीकृष्ण के वंशज हैं, जो स्वयं गोपालक (गाय चराने वाले) थे।
मध्यकाल में धनगरों ने मराठा साम्राज्य और अन्य राज्यों में सैनिक, चरवाहे, और व्यापारी के रूप में भूमिका निभाई। कई धनगर योद्धाओं ने मराठा सेना में सेवा की और देश की रक्षा में योगदान दिय
🌍 भारत में धनगर जनसंख्या
भारत की जनगणना 2011 के अनुसार, धनगर समाज की अनुमानित जनसंख्या लगभग 1.2 करोड़ (12 मिलियन) के आसपास है। हालाँकि, यह संख्या आज 2025 तक बढ़कर 1.6 से 1.8 करोड़ के बीच मानी जाती है।
राज्यों के अनुसार अनुमानित जनसंख्या (2025 तक):
राज्य अनुमानित जनसंख्या कुल राज्य जनसंख्या में प्रतिशत
महाराष्ट्र लगभग 90 लाख 7–8%
कर्नाटक लगभग 25 लाख 4%
आंध्र प्रदेश / तेलंगाना लगभग 10 लाख 2%
मध्य प्रदेश लगभग 5 लाख 1%
उत्तर प्रदेश लगभग 3 लाख 0.5%
अन्य राज्य (गुजरात, राजस्थान, गोवा आदि) लगभग 2 लाख 0.2%
👉 कुल मिलाकर, भारत में धनगर समाज की आबादी लगभग 1.5 करोड़ से अधिक मानी जाती है।
🏡 धनगर समाज की जीवनशैली और संस्कृति
धनगर समाज की अपनी लोकसंस्कृति, भाषा, और रीति-रिवाज हैं।
इनकी जीवनशैली ग्रामीण और पशुपालन आधारित होती है।
🔸 मुख्य विशेषताएँ:
पशुपालन और खेती इनकी मुख्य आजीविका है।
धनगर पुरुष पारंपरिक रूप से ऊनी कपड़े और पगड़ी पहनते हैं।
महिलाएँ सुंदर लुगड़ा (साड़ी) और चांदी के आभूषण पहनती हैं।
धनगरों का प्रसिद्ध लोकनृत्य है धनगरी गोंधळ और पवाडा।
ये लोग देवता बिरोबा, हुलकाई देवी, और जोगबा देवी की पूजा करते हैं।
🧑🎓 शिक्षा और सामाजिक स्थिति
पिछले कुछ दशकों में धनगर समाज ने शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है।
पहले यह समाज शिक्षा से वंचित था क्योंकि उनका जीवन अधिकतर गाँवों और पहाड़ी इलाकों में बीतता था। लेकिन अब नई पीढ़ी स्कूल और कॉलेज तक पहुँच रही है।
सरकार द्वारा भी धनगर समाज के लिए कई कल्याणकारी योजनाएँ चलाई जा रही हैं, जैसे:
छात्रवृत्ति योजना
आवास योजना
स्वरोजगार योजना
फिर भी, समाज के एक बड़े हिस्से को अभी भी आरक्षण की स्पष्ट पहचान (Scheduled Tribe Status) की माँग है, खासकर महाराष्ट्र में।
⚖️ धनगर समाज की राजनीतिक स्थिति
धनगर समाज महाराष्ट्र, कर्नाटक और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली समुदाय माना जाता है।
कई धनगर नेता राज्य की विधानसभाओं और संसद में महत्वपूर्ण पदों पर पहुँचे हैं।
यह समाज ST आरक्षण की माँग को लेकर कई वर्षों से आंदोलनरत है। महाराष्ट्र सरकार ने इस पर कई बार विचार किया है, लेकिन अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
🌱 आर्थिक स्थिति
धनगर समाज का पारंपरिक पेशा भले ही पशुपालन रहा हो, पर अब धीरे-धीरे समाज के लोग:
व्यवसाय
शिक्षा
राजनीति
सरकारी नौकरियों
में भी आगे बढ़ रहे हैं।
कुछ क्षेत्रों में ये लोग ऊन उत्पादन, डेयरी उद्योग और कृषि व्यवसाय में सफल उद्यमी बन चुके हैं।
🕊️ धनगर समाज का भविष्य
आज का धनगर समाज जागरूक, शिक्षित और आधुनिक हो रहा है। नई पीढ़ी शिक्षा और तकनीकी ज्ञान की ओर बढ़ रही है।
सरकार से अपेक्षा है कि उन्हें उचित सामाजिक और आर्थिक सहायता मिले ताकि यह समुदाय भी भारत के विकास में बराबरी का हिस्सा बन सके।
🧭 निष्कर्ष
धनगर समाज भारत के उन मेहनती समुदायों में से एक है जिन्होंने सदियों से देश की अर्थव्यवस्था और संस्कृति में योगदान दिया है।
इनका इतिहास गौरवशाली है, वर्तमान संघर्षपूर्ण है, और भविष्य उज्ज्वल है।
यदि समाज एकजुट होकर शिक्षा, जागरूकता और संगठन पर ध्यान दे, तो धनगर समाज आने वाले समय में भारत के प्रमुख प्रगतिशील समुदायों में शामिल हो सकता है।
