TCS Job Loss 2025: 2,500 कर्मचारी प्रभावित, क्या है वजह?

 




TCS में नौकरी-कटौती का विवाद : एक विश्लेषण


भारत की प्रमुख आईटी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) इस समय एक गहन विवाद के केंद्र में है। कंपनी पर आरोप है कि उसने अपनी कार्यशक्ति में बड़े पैमाने पर कटौती की है — लगभग 12,000 कर्मचारी और पुणे कार्यालय में करीब 2,500 लोगों को इस्तीफा देने को मजबूर किया गया। इस लेख में हम देखेंगे कि ये घटनाएँ कैसे सामने आईं, इनका प्रभाव क्या है, और आगे क्या हो सकता है।



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संदर्भ और तथ्य


1. 12,000 कर्मचारियों की कटौती

TCS ने जुलाई 2025 में घोषणा की कि वह अपनी वैश्विक कार्यशक्ति का लगभग 2 % हिस्सा (लगभग 12,000 कर्मचारी) हटा देगा। 

कंपनी का तर्क है कि यह “skill realignment” (कुशलता पुनर्संरचना) और भविष्य-उन्मुख संगठन बनने की जरूरत के चलते है। 



2. पुणे में 2,500 कर्मचारियों को इस्तीफा देने का दबाव

महाराष्ट्र स्थित IT कर्मचारियों की संस्था NITES ने दावा किया है कि TCS ने पुणे कार्यालय में लगभग 2,500 कर्मचारियों को इस्तीफा देने को बाध्य किया है। 

इसके खिलाफ, कंपनी ने इसे “भ्रामक सूचना” (misinformation) कहा है और यह दावा किया है कि उनकी “skill realignment” पहल केवल सीमित कर्मचारियों को प्रभावित करती है। 



3. कंपनी की प्रतिक्रिया और अन्य कदम


TCS ने कहा है कि ये छंटनी “मध्यम और वरिष्ठ स्तर” के कर्मचारियों को लक्षित करती है। 


कंपनी ने यह भी घोषणा की कि जून 2025 में यह निर्णय लिया गया था। 


इसके साथ ही, TCS ने कहा कि कंपनी 1 सितंबर 2025 से लगभग 80 % कर्मचारियों के लिए वेतन वृद्धि (increment) देगी। 


इसके अतिरिक्त, मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि प्रभावित कर्मचारियों को 6 महीने से 2 साल तक की सेवरेन्स (severance) पैकेज मिलने की योजना है, विशेष रूप से वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए। 




4. बृहद चिंताएँ और आलोचनाएँ


कर्मचारियों और यूनियनों ने आरोप लगाया है कि TCS उन अनुभवी कर्मचारियों को निकालने के बाद नई भर्ती के लिए “फ्रेशर” (नवीन) कर्मचारियों को बहुत कम वेतन पर रख रही है। 


इस कदम से कर्मचारियों में डर, असुरक्षा और मनोवैज्ञानिक दबाव की स्थितियाँ उत्पन्न हो रही हैं।


विश्लेषक यह कह रहे हैं कि यदि TCS जैसी प्रतिष्ठित कंपनी ऐसा कदम उठा रही है, तो यह संकेत है कि IT क्षेत्र में AI और ऑटोमेशन के दबाव से संरचनात्मक बदलाव हो रहे हैं। 


यह प्रवृत्ति केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे आउटसोर्सिंग/आईटी उद्योग में नौकरी सुरक्षा को चुनौती दे सकती है। 






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संभावित प्रभाव और चुनौतियाँ


नौकरी सुरक्षा पर संकट

12,000 कर्मचारियों की छंटनी, विशेषकर मिड-सीनियर स्तर पर, यह संदेश देती है कि “रोजगार स्थिरता” अब उतनी सुनिश्चित नहीं रही।


मानव संसाधन (HR) और कौशल रिक्तियाँ

अनुभवी कर्मचारियों की अनुपस्थिति से परियोजनाओं में अनुभव की कमी हो सकती है।


प्रतिष्ठा और भरोसा को ठेस

कंपनी की दीर्घकालीन छवि “नौकरी देने वाली सुरक्षित जगह” से बदल सकती है।


संघर्ष और कानूनी विवाद

यदि यह साबित हुआ कि कर्मचारियों को दबाव देकर इस्तीफा दिलाया गया, तो श्रम कानूनों व विधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।


शिक्षण और पुनर्संगठन

TCS और अन्य कंपनियों को अब अपने कर्मचारियों को पुनःक्षमता (reskilling / upskilling) देने की ज़रूरत होगी, ताकि बदलती तकनीकी आवश्यकताओं से तालमेल बिठाया जा सके।


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