EPF योगदान कैसे बढ़ाएं? नए बदलाव और नियम 2025
अभी तक लागू EPF नियम और कुछ कम ज्ञात पहलू
1. अनिवार्य योगदान सीमा और विकल्प (Para 26(6))
EPF में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को सामान्यतः Basic + DA का 12% योगदान करना होता है। यह नियम अनिवार्य है और ₹15,000 तक की Basic + DA पर लागू होता है। यदि Basic + DA ₹15,000 से अधिक है, तो सदस्यता वैकल्पिक होती है और उसे Para 26(6) के तहत ऑप्शन के साथ आवेदन करना होता है, जो छह महीने के भीतर EPFO को जमा करना होता है।
2. अतिरिक्त योगदान (Voluntary Contribution)
कर्मचारी अधिक राशि EPF में जमा करने के इच्छुक हों, तो उन्हें Para 26(6) के तहत डिजिटल रूप से EPFO से मंजूरी लेनी होती है।
पर ध्यान दें: अगर आप प्रति वर्ष ₹2.5 लाख से अधिक योगदान करते हैं, तो उस अतिरिक्त योगदान पर मिलने वाला ब्याज कर योग्य हो जाता है। यानी, ₹2.5 लाख तक का ब्याज टैक्स-फ्री है, लेकिन उससे अधिक पर टैक्स लगता है।
3. योगदान दर बढ़ने का संभावित प्रस्ताव
वर्तमान योगदान दर 12% है, लेकिन भविष्य में इसे 14% तक बढ़ाने पर विचार हो सकता है। हालांकि, कोई आधिकारिक घोषणा या नियम अभी नहीं हुआ है — केवल चर्चा के स्तर पर यह सुझाव मौजूद है।
4. FAT (Face Authentication Technology) नियम – नया अपडेट
1 अगस्त 2025 से UAN बनाने के लिए (विशेषकर नए कर्मचारियों के लिए) UMANG ऐप द्वारा आधार आधारित चेहरे की पहचान (FAT) अनिवार्य कर दी गई है। इससे कई कर्मचारियों—विशेषकर जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है या जिनका मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं है—को बहुत परेशानी हो सकती है। UAN न बनने की वजह से PF खाते समय से एक्टिव नहीं होते और PF का पैसा जमा नहीं हो पाता।
इस बदलाव के कारण स्टाफिंग कंपनियों और संविदा कर्मचारियों की ऑनबोर्डिंग में देरी हो रही है। Indian Staffing Federation (ISF) ने EPFO को सुझाव दिए हैं, जैसे FAT की पात्रता और प्रक्रिया में राहत, प्रशिक्षण, और कर्मचारियों के लिए आसान विकल्प।
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जो सामान्यतः Google पर आसानी से नहीं मिलता (कम ज्ञात या अनुपयुक्त टिप्स)
नीचे दिए गए बिंदु EPFO की वेबसाइट या प्रमुख स्रोतों जैसे Google पर सीधे नहीं मिलते, लेकिन वे आपकी सुविधा और जानकारी के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं:
A. EPF में योगदान बढ़ाने से पहले ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें
1. लॉक-इन अवधि और वित्तीय योजनाएँ
EPF राशि को निकालना बहुत सीमित शर्तों पर ही संभव है — जैसे कि मेडिकल इमरजेंसी, शादी, घर निर्माण आदि। इसलिए अधिक योगदान से पहले अपनी लिक्विडिटी और आकस्मिक जरूरतों का ध्यान रखें।
2. कर लाभ और टैक्स योग्यता
EPF पर मिलने वाला ब्याज ₹2.5 लाख तक टैक्स-फ्री है — लेकिन अधिक योगदान पर ब्याज टैक्स योग्य हो जाता है। यह जानना जरूरी है कि आपकी अतिरिक्त या VPF (Voluntary PF) में जमा की गई राशि से मिलने वाले ब्याज पर कर की देनदारी हो सकती है — विशेषकर उच्च टैक्स ब्रैकेट में।
3. सुविधा और डिजिटल तैयारी
EPF का उपयोग तभी आसान होता है जब आपके UAN, Aadhaar, PAN, बैंक खाते आदि का KYC पूरा हो। FAT नियम जैसे बदलावों के समय, तकनीकी तैयारी और प्रशिक्षण की कमी बड़ी बाधा हो सकती है। इसलिए, नियोक्ता और कर्मचारी दोनों ही तकनीकी तैयारी करें और EPFO के नवीनतम अपडेट पढ़ते रहें।
B. अनुप्रयुक्त या सावधानीपूर्ण सुझाव
1. समय से पहले उच्च योगदान से बचें
यदि आप नौकरी बदलने या अप्रत्याशित रूप से जरूरत पड़ने से पहले अपनी राशि को निकालना चाहें, तो अतिरिक्त योगदान की वजह से टैक्स या TDS ज्यादा लग सकता है। खासकर अगर 5 साल से कम समय में ₹50,000 से अधिक निकालते हैं — TDS लागू होता है।
2. सीमित जागरूकता और प्रशिक्षण
FAT जैसे डिजिटल उपाय लागू हो जाने पर, कई कर्मचारी जागरूक नहीं होते कि उन्हें क्या करना है — मोबाइल नंबर लिंक करना, स्मार्टफोन का प्रयोग, रिकॉग्निशन आदि। नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग देनी चाहिए जिससे वे आसानी से UAN और FAT प्रक्रिया से गुजर सकें।
3. ISF के सुझाव EPFO तक पहुँचना चाहिए
यदि आप किसी बड़े स्टाफिंग / संविदा कर्मचारी समूह के अंतर्गत आते हैं, तो आप ISF के सुझावों का उपयोग कर सकते हैं और अपनी कंपनी के माध्यम से EPFO तक संवाद स्थापित कर सकते हैं। EPFO को FAT के लिए कुछ समय-सीमा में राहत या तकनीकी सपोर्ट प्रदान करना चाहिए, जैसा ISF ने सुझाव दिया है।
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निष्कर्ष – लगभग 1000 शब्दों में सारांश
यदि आप EPF में योगदान बढ़ाने (बेहतर भविष्य के लिए VPF विकल्प) के बारे में सोच रहे हैं, तो आपको निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:
1. वर्तमान में EPF का अनिवार्य योगदान 12% (Basic + DA पर) है। ₹15,000 तक यह ऑटोमैटिक है। ऊपर होने पर Para 26(6) का विकल्प अपनाकर आवेदन करना होता है।
2. अतिरिक्त योगदान (VPF) संभव है, लेकिन ₹2.5 लाख से अधिक पर ब्याज पर टैक्स लगता है।
3. संभवतः भविष्य में योगदान दर 14% हो सकती है — लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक नियम नहीं है।
4. UAN बनवाने में नया FAT नियम लागू हो गया है (1 अगस्त 2025 से)। मोबाइल, स्मार्टफोन, आधार लिंकिंग आदि की तैयारी जरूरी है।
5. FAT की डिजिटल चुनौतियों के कारण स्टाफिंग कंपनियां और संविदा कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं। ISF ने EPFO को राहत, टेक्निकल सपोर्ट और प्रशिक्षण देने का सुझाव दिया है।
6. अतिरिक्त योगदान से पहले अपनी लिक्विडिटी, टैक्स योग्यता (खासकर TDS), और निकासी संभावनाओं पर ध्यान दें।
7. UAN, Aadhaar, PAN, बैंक खाते आदि का पूर्ण KYC कर लें — डिजिटल सेवाओं का लाभ तभी मिलेगा।
8. नियोक्ता और कर्मचारी दोनों FAT और EPF डिजिटल सेवाओं के बारे में जागरूक रहें और प्रोग्राम तैयार रखें।

